Wednesday, December 22, 2010

हे ! प्रिय चिंतक-शुभचिंतक और अ-शुभचिंतको...

हमारी ज़िदंगी में चिंतक-शुभचिंतक और अ-शुभचिंतकों का होना कितना ज़रूरी है, ये किसी को बताने या छुपाने की आवश्यकता नहीं है। जब भी हम ज़रा सा परेशान होते हैं या फिर किसी मुसिबत में होते हैं.. तो सबसे पहले चिंतक और शुभचिंतक ही हमारा हाल जानने के लिए पहुंचे जाते हैं। उनके आने पर हमारे दिल को भी सुकून मिलता है। हम सोचते हैं कि, चलो इस दुनिया में कोई तो है हमारा ख़ैरख़्वाह। लेकिन उधर हमारे अ-शुभचिंतक यह सोच कर दुःखी हो उठते हैं कि इनके पास इतने सारे शुभचिंतक कैसे हो सकते हैं.. और फिर यही अ-शुभचिंतक तत्काल प्रभाव से एक योजना को अंजाम देते हुए घोषणा कर डालते हैं अगली दफा कोई भी अन्य शुभचिंतक इनके दरवाजे पर नही पहुंच पाए।



इन दिनों में ऐसे ही कुछ शुभचिंतकों और अशुभचितकों के बीच फंसा हुआ हूं। आजकल यही शुभचिंतक-अशुभचिंतक मेरी जिदंगी में किसी हिन्दी सिनेमा के खलनायक की भूमिका निभाने में जुटे हैं। या फिर यू कहूं कि यह डकैत बन गए हैं.. क्योंकि इन्होंने मेरी रातों की नीद और दिन का चैन लूट लिया है। मेरी समझ में यह नहीं आता कि इनकी प्रताड़ना की रपट किस थाने में जाकर दर्ज कराऊं।


कुछ दिनों पहले मोहर्रम के लिए मैं दिल्ली से बाहर गया.. सर्द रातों में जहां झिंगूर भी बोलने से कतराते हैं.. वहीं अचानक से मेरे फोन की घंटी बजी.. बेध्यानी में उठाया गया फोन जैसे ही कान पर रखा तो दूसरी तरफ मेरा शुभचिंतक बोलना शुरू कर चुका था, " सर ! सर ! .. मैं बोल रहा हूं.. मुझे आज ही पता चला..यह तो बहुत बुरा हुआ.. सर ! मुझे लगता है कि आपके खिलाफ किसी ने चाल चली है..।" इससे पहले कि मैं कुछ समझ पाता कि माजरा क्या है.. फोन कट गया।


शहर की भागती दौड़ती-जिदंगी में हमें वक़्त का अहसास नही होता.. यहां तक कि हमें अपने सोने-जागने तक का टाईम मालूम नहीं रहता। कम से कम मेरे साथ तो कुछ ऐसा ही है.. जब नींद आई तो रात मानकर आंखें मूंद लीं.. और आंख खुली तो सुबह मान ली। मगर गांव देहात में आज भी सारा काम समय के हिसाब से ही होता है। लिहाजा अगले दिन सुबह साढ़े चार बजे मैं सोकर उठा ही था कि एक और शुभचिंतक ने फोन की घंटी बजाई।


कैसे हो ! अब्बास भाई ! यार मैं (शुभचिंतक) नाईट शिफ्ट में था..और अभी-अभी मैंने (शुभचिंतक) बला-बला साइट पर देखा कि आप जा रहे है ?। यार ! आपने कभी बताया नही.. ऐसी भी भला कोई दोस्ती होती है ?। अब की बार मैंने अपने शुभचिंतक की बात को नींद की दहाड़ से काटते हुए सवाल दाग दिया, भाई ! शुभचिंतक ! मैंने आपको क्या नहीं बताया...?...और इसमें बताने वाली तो कोई बात ना थी.. मुझे आना था तो मैं आ गया.. इसमें नाराजगी कैसी दोस्त...? इतना सुनते ही शुभचिंतक बिफरते हुए बोले, "आप दिल्ली आए.. तो बात होगी..।" इतना कह कर उन्होंने फोन काट दिया।


आज दोपहर दिन के दो बजे.. धूप में बैठा हुआ मैं.. दिल्ली की सर्दी को मुंह चिढ़ा रहा था.. कि अचनाक से मेरे एक शुभचिंतक (या फिर शुभचिंतकनी) का फोन आया.. मेरे गुड नून करते ही उसने बोलना शुरू कर दिया।


यार अब्बास !...?...तुम तो बढ़े ही बेवफा निकले.. अकेले ही बनारस शिफ्ट हो गए.. पिछली मुलाक़ात के दौरान एक बार भी नही बताया.. और आज सुबह जैसे ही मुझे पता चला तो मैं (शुभचिंतक / शुभचिंतकनी) फला-फला साइट पर तुम्हारा नाम देखर दंग रह गई। खैर ! वैसे भी बनारस तो तुम्हारे प्रिय शहरों में शामिल है.. बेटे ! अब तो तुम्हारी मौज़ा ही मौज़ा है।


चिंतक-शुभचिंतक/शुभचिंतकनी से इधर-उधर की दो-चार बातें करने के बाद मैनें अपने परिवार से सबसे पहला सवाल यही किया.." मैं बनारस कब शिफ्ट हो गया...?...मुझे ही इसकी जानकारी नहीं...।"


अंतः हे ! मेरे शुभचिंतकों ! आप सभी का धन्यवाद...साथ ही धन्यवाद देता हूं मैं अपने उन शुभचिंतकों का जिन्होंने रात-बेरात फोन लगाकर अपना अपार प्रेम प्रकट किया।  
     हमारी ज़िदंगी में चिंतक-शुभचिंतक और अ-शुभचिंतकों का होना कितना ज़रूरी है, ये किसी को बताने या छुपाने की आवश्यकता नहीं है। जब भी हम ज़रा सा परेशान होते हैं या फिर किसी मुसिबत में होते हैं.. तो सबसे पहले चिंतक और शुभचिंतक ही हमारा हाल जानने के लिए पहुंचे जाते हैं। उनके आने पर हमारे दिल को भी सुकून मिलता है। हम सोचते हैं कि, चलो इस दुनिया में कोई तो है हमारा ख़ैरख़्वाह। लेकिन उधर हमारे अ-शुभचिंतक यह सोच कर दुःखी हो उठते हैं कि इनके पास इतने सारे शुभचिंतक कैसे हो सकते हैं.. और फिर यही अ-शुभचिंतक तत्काल प्रभाव से एक योजना को अंजाम देते हुए घोषणा कर डालते हैं अगली दफा कोई भी अन्य शुभचिंतक इनके दरवाजे पर नही पहुंच पाए।


इन दिनों में ऐसे ही कुछ शुभचिंतकों और अशुभचितकों के बीच फंसा हुआ हूं। आजकल यही शुभचिंतक-अशुभचिंतक मेरी जिदंगी में किसी हिन्दी सिनेमा के खलनायक की भूमिका निभाने में जुटे हैं। या फिर यू कहूं कि यह डकैत बन गए हैं.. क्योंकि इन्होंने मेरी रातों की नीद और दिन का चैन लूट लिया है। मेरी समझ में यह नहीं आता कि इनकी प्रताड़ना की रपट किस थाने में जाकर दर्ज कराऊं।


कुछ दिनों पहले मोहर्रम के लिए मैं दिल्ली से बाहर गया.. सर्द रातों में जहां झिंगूर भी बोलने से कतराते हैं.. वहीं अचानक से मेरे फोन की घंटी बजी.. बेध्यानी में उठाया गया फोन जैसे ही कान पर रखा तो दूसरी तरफ मेरा शुभचिंतक बोलना शुरू कर चुका था, " सर ! सर ! .. मैं बोल रहा हूं.. मुझे आज ही पता चला..यह तो बहुत बुरा हुआ.. सर ! मुझे लगता है कि आपके खिलाफ किसी ने चाल चली है..।" इससे पहले कि मैं कुछ समझ पाता कि माजरा क्या है.. फोन कट गया।

शहर की भागती दौड़ती-जिदंगी में हमें वक़्त का अहसास नही होता.. यहां तक कि हमें अपने सोने-जागने तक का टाईम मालूम नहीं रहता। कम से कम मेरे साथ तो कुछ ऐसा ही है.. जब नींद आई तो रात मानकर आंखें मूंद लीं.. और आंख खुली तो सुबह मान ली। मगर गांव देहात में आज भी सारा काम समय के हिसाब से ही होता है। लिहाजा अगले दिन सुबह साढ़े चार बजे मैं सोकर उठा ही था कि एक और शुभचिंतक ने फोन की घंटी बजाई।


कैसे हो ! अब्बास भाई ! यार मैं (शुभचिंतक) नाईट शिफ्ट में था..और अभी-अभी मैंने (शुभचिंतक) बला-बला साइट पर देखा कि आप जा रहे है ?। यार ! आपने कभी बताया नही.. ऐसी भी भला कोई दोस्ती होती है ?। अब की बार मैंने अपने शुभचिंतक की बात को नींद की दहाड़ से काटते हुए सवाल दाग दिया, भाई ! शुभचिंतक ! मैंने आपको क्या नहीं बताया...?...और इसमें बताने वाली तो कोई बात ना थी.. मुझे आना था तो मैं आ गया.. इसमें नाराजगी कैसी दोस्त...? इतना सुनते ही शुभचिंतक बिफरते हुए बोले, "आप दिल्ली आए.. तो बात होगी..।" इतना कह कर उन्होंने फोन काट दिया।


आज दोपहर दिन के दो बजे.. धूप में बैठा हुआ मैं.. दिल्ली की सर्दी को मुंह चिढ़ा रहा था.. कि अचनाक से मेरे एक शुभचिंतक (या फिर शुभचिंतकनी) का फोन आया.. मेरे गुड नून करते ही उसने बोलना शुरू कर दिया।


यार अब्बास !...?...तुम तो बढ़े ही बेवफा निकले.. अकेले ही बनारस शिफ्ट हो गए.. पिछली मुलाक़ात के दौरान एक बार भी नही बताया.. और आज सुबह जैसे ही मुझे पता चला तो मैं (शुभचिंतक/शुभचिंतकनी) फला-फला साइट पर तुम्हारा नाम देखर दंग रह गई। खैर ! वैसे भी बनारस तो तुम्हारे प्रिय शहरों में शामिल है.. बेटे ! अब तो तुम्हारी मौज़ा ही मौज़ा है।


चिंतक-शुभचिंतक/शुभचिंतकनी से इधर-उधर की दो-चार बातें करने के बाद मैनें अपने परिवार से सबसे पहला सवाल यही किया.." मैं बनारस कब शिफ्ट हो गया...?...मुझे ही इसकी जानकारी नहीं...।"


अंतः हे ! मेरे शुभचिंतकों ! आप सभी का धन्यवाद...साथ ही धन्यवाद देता हूं मैं अपने उन शुभचिंतकों का जिन्होंने रात-बेरात फोन लगाकर अपना अपार प्रेम प्रकट किया।

Saturday, November 6, 2010

इस दीपावली पर महिलाओं की दबंगाई !

नवरात्रों में मां दुर्गा के नौ रूपो को पूजने के बाद अगली बारी आती है दीपावाली में लक्ष्मी पूजा की। दुर्गा और लक्ष्मी पूजा तो हम इसलिए भी करते है क्योंकि यह हमारे देव-देवियों में शामिल है। लेकिन इस बार की दीपावली हम सबके के लिए कुछ खास है। दीपावली इस पूरे सप्ताह में दुनिया-भर के समाचारो में महिलाओं के दबंगाई की ख़बरे ही छाई हुई है। इन महिलाओं ने अपने-2 क्षेत्रों में अच्छी खासी महारत हासिल की हुई है। जिनको हम इस दीपावाली पर महिलाओं की दबंगाई भी कहे सकते हैं।

गोयाकि, महिलाओं का नाम आते ही कही आप पूरा आर्टिकल पढे बिना ही आगे ना निकल जायेइगा। जनाब तो क्या आप नही मिलना चाहेंगे इन रियल लाइफ दबंग महिलाओं से....अगर हां तो फिर बने रहे हमारे साथ।
सबसे पहले नजर डालते है भारतीय मीडिया में छाए उस पर टॉपिक पर जो दिल्ली से प्रसारित होने वाले राष्ट्रीय स्तर के समाचार चैनल और समाचार पत्रों के संपादको का सबसे प्रिय है। इस विषय पर सभी प्रकार की खबरे कराने के लिए मीडिया समूहों ने अपनी पूरी ताकत झोक रखी है। अब अगर मीडिया ताकत लगाए तो भला वह कोई ऐसे-वेसे ही थोडे लगाऐगा। उसके लिए व्यक्ति भी तो दमदार होना चाहिए ना। और वह है दुनिया के सबसे ताकतवर देश अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा का भारत प्रवास एक तरफ जहां भारत सरकार इस दौरे का राजनीतिक लाभ उठाने की तैयारियों में लगी है तो वही भारतीय मीडिया बराक ओबामा की पत्नि Michelle Obama के दौरे पर तरह-2 की स्टोरी दिखा रही। हर मीडिया समूह, हर रोज एक अलग किस्म की स्टोरी ले कर आ रहा है। एक मीडिया समूह ने तो बराक ओबामा की पत्नि के बारे में यह तक बता डाला कि वह भारत प्रवास के दौरान पूरी तरह भारतीय पोशको में ही नज़र आएगी।  साथ ही अपनी बात को सही साबित करने के लिए इस समूह ने अपने समाचार में Michelle Obama की भारतीय साड़ी पहने हुए एक तस्वीर तक छाप दी। मीडिया में Michelle Obama क्या मथुरा के पेढे खाएंगी या फिर बनारसी पान। दिल्ली में उनके लिए चाट कौन बना रहा है तो कान में बरेली का झुमका किस दुकान का होगा या फिर राजस्थानी लहरियां साड़ी कौन डिजाइयन करेगा आदि आदि स्टोरियों हो रही है। मीडिया भोली-भाली जनमानस को वह सब ऐसे बता रही है जैसे गोयाकि Michelle Obama नही बल्कि किसी बाग में गुल के गुले-गुले हो।
 
दूसरी महिला की बात करे तो वह है एन्टोनिया मैनो। नही समझे सर जी !  मेरा  मतलब ! है कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की चौथी बार चुनी गई अध्यक्ष श्रीमति सोनिया गांधी। इटली के विसेन्जा में एक छोटे से गांव लूसियाना में जन्मी सोनिया गांधी को अमेरिकी समाचार चैनल सीएनएन ने एशिया की सबसे आठ ताकतवर महिलाओं की सूची में शामिल किया है। इसके साथ ही प्रतिष्ठित पत्रिका फोर्ब़्स ने दुनिया की 6.8 अरब आबादी में से 68 सबसे ज्यादा ताकवारों लोगों की लिस्ट में भी शामिल किया है, सोनिया गांधी को। राजनीति में सोनिया की दबंगाई यही खत्म नही होती उन पर स्पेनिश लेखक जेवियर मोरो ने एक किताब " रेड साड़ी" लिख डाली। जिसपर कांग्रेसियों ने जमकर हौ-हव्वा मचाया और अंत में किताब के राईटर को कानूनी नोटिस तक भेज दिया मोरो ने अपनी किताब में लिखा है कि, "राजीव की मौत ने सोनिया को झक-झोर कर रख दिया और उसके बाद वह वापस इटली लौट जाना चाहती थी" यह बात कांग्रेसी कार्यकर्ताओं को ना गवारगुजरी।  भला यह कैसा हो सकता है कि उनका बहादुर योद्धा पति की मौत के बाद इतना कमजोर कैसे हो सकता है कि टूट कर वापस जाने की सोचे। गोयाकि कार्यकर्ता उतर गए विरोध-प्रदर्शन करने।
 
इस सप्ताह एक और बड़ी खबर आई भारत के पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर से। जहां आयरन लेडी ऑफ मणिपुर के नाम से मशहुर ईरोम शर्मिला चानू के अनशन को दस साल पूरे हो गए। पेशे से सामाजिक कार्यकर्ता-पत्रकार और कवि शर्मिला आर्म्ड फोर्सेस स्पेशल एक्ट (AFSPA) को रद्द करने की मांग कर रही है। आपको याद दिला दे कि भारत में सेना और अर्धसैनिक बलों पर अक्सर AFSPA के दुरूउपयोग के करने के आरोप लगते रहते है। शर्मिला के इ अनशन को जारी रखने का फैसाल भी इसके दुरूउपयोग को लेकर है। जो आज से दस साल पहले एक वृद्ध महिला लेईसांगबाम इबेटोमी और 1988 में राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार विजेता सिनाम चंद्रमणि की सुरक्षा बलों द्वारा की गई हत्या के आरोप में शुरू किया है।

इस दीपावली पर महिलाओं ने सबसे ज्यादा गदर मचाया विश्व के दो ताकवर देशों में हुए राजनीतिक चुनावों में। दक्षिण अमेरिका महाद्वीप के सबसे बड़े देश ब्राजील में सत्ताधारी वर्कर्स पार्टी की उम्मीदवार और विश्व में आयरन लेडी के नाम से मशहुर डिल्मा रॉसेफ ने राष्ट्रपति पद का चुनाव जितकर इतिहास रच डाला। तो दूसरी तरफ अमेरिका में हुए संसदीय चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी की उम्मीदवार निकी हैली ने डैमोक्रेट पार्टी के उम्मीदवार विसेंट शेहीन को हरा कर दक्षिणी कैरॉलाइना राज्य के गवर्नर और कमला देवी हैंरिस ने कांटे की टक्कर में रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार स्टीव कूली को हरा कर कैलीफोर्नियां के अटॉर्नी जनरल पद पर कब्जा कर लिया।
 
यह दोनों महिलाएं भारतीय मूल की है। कमला हैंरिस चैन्नई मूल की ड़ॉ श्यामला गोपालन और अफ्रीकी मूल के अर्थशास्त्री डोनल्ड हैंरिस की पुत्री है। कमला हैंरिस को महिला ओबामा के नाम से भी पुकारा जाता है, क्योंकि कमला को डैमोक्रेटिक पार्टी का उम्मीदवार बनाने के प्रस्ताव का समर्थन स्वंय बराक ओबामा ने किया था।

दुनिया में जनसंख्या के अनुपात में सबसे अधिक आबादी रखने वाला चीन भी किसी रूप में पीछे नही रहना चाहता। हाल ही शंघाई की हुरून ने अपनी एक रिपोर्ट में विश्व की तीन सर्वाधिक धनी महिलाओं का चीन का निवासी बताया है ।  इतना ही नही अमेरिकी समाचार चैनल सीएनएन ने अपनी सूची में चीन की नाईन ड्रेगनस पेपर होल्डिंग्स की मालिक झांग यीन को सर्वोच्च स्थान दिया है।
 
विश्व में रियल लाइफ की सबसे बड़ी दबंग है, 20 वर्षीय मारिसोल वालेस गार्सिया। इस रियल लाइफ दबंग को हाल ही में मेक्सिको के सबसे ज्यादा हिंसाग्रस्त शहर गुदाल्पु डिस्ट्रीटो ब्रावो का पुलिस प्रमुख नियुक्त किया गया है। 10,000 की आबादी वाले इस शहर में ड्रग माफिया का एकछत्र राज चलता है। ड्रग माफिया का ख़ौफ इतना है कि इस शहर में पोस्टिंग पाने वाले अधिकतर पुलिसवाले नौकरी छोड़ चुके है।

क्रिमिनोलॉजी की स्टूडेंट गार्सिया को हर महीने 400 डॉलर यानि लगभग 2 लाख रूपये के वेतन पर नियुक्ति किया गया है। पद संभालते हुए अपनी पहली प्रेसवार्ता में उन्होंने कहां कि, हालात बदल सकते हैं अगर हम खुद पर भरोसा रखें, और मैं हालात सुधाकर दुनिया को दिखाना चाहती हूं कि हां, हम ये कर सकते हैं, हम ये नयी पीढ़ी के लिए कर रहैं जो निश्चत रूप से डर के साए में नही रहना चाहती
 
चालिए ! जनाब । मैं तो चला इस दीवापली पर लक्ष्मी पूजा के साथ-साथ इन देवियों की भी पूजा करने। और आप मनाइए दीपों का पर्व दीपावली।। 

इस दीपावली पर महिलाओं की दबंगाई !

नवरात्रों में मां दुर्गा के नौ रूपो को पूजने के बाद अगली बारी आती है दीपावाली में लक्ष्मी पूजा की। दुर्गा और लक्ष्मी पूजा तो हम इसलिए भी करते है क्योंकि यह हमारे देव-देवियों में शामिल है। लेकिन इस बार की दीपावली हम सबके के लिए कुछ खास है। दीपावली इस पूरे सप्ताह में दुनिया-भर के समाचारो में महिलाओं के दबंगाई की ख़बरे ही छाई हुई है। इन महिलाओं ने अपने-2 क्षेत्रों में अच्छी खासी महारत हासिल की हुई है। जिनको हम इस दीपावाली पर महिलाओं की दबंगाई भी कहे सकते हैं।

गोयाकि, महिलाओं का नाम आते ही कही आप पूरा आर्टिकल पढे बिना ही आगे ना निकल जायेइगा। जनाब तो क्या आप नही मिलना चाहेंगे इन रियल लाइफ दबंग महिलाओं से....अगर हां तो फिर बने रहे हमारे साथ।

सबसे पहले नजर डालते है भारतीय मीडिया में छाए उस पर टॉपिक पर जो दिल्ली से प्रसारित होने वाले राष्ट्रीय स्तर के समाचार चैनल और समाचार पत्रों के संपादको का सबसे प्रिय है। इस विषय पर सभी प्रकार की खबरे कराने के लिए मीडिया समूहों ने अपनी पूरी ताकत झोक रखी है। अब अगर मीडिया ताकत लगाए तो भला वह कोई ऐसे-वेसे ही थोडे लगाऐगा। उसके लिए व्यक्ति भी तो दमदार होना चाहिए ना। और वह है दुनिया के सबसे ताकतवर देश अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा का भारत प्रवास एक तरफ जहां भारत सरकार इस दौरे का राजनीतिक लाभ उठाने की तैयारियों में लगी है तो वही भारतीय मीडिया बराक ओबामा की पत्नि Michelle Obama के दौरे पर तरह-2 की स्टोरी दिखा रही। हर मीडिया समूह, हर रोज एक अलग किस्म की स्टोरी ले कर आ रहा है। एक मीडिया समूह ने तो बराक ओबामा की पत्नि के बारे में यह तक बता डाला कि वह भारत प्रवास के दौरान पूरी तरह भारतीय पोशको में ही नज़र आएगी।  साथ ही अपनी बात को सही साबित करने के लिए इस समूह ने अपने समाचार में Michelle Obama की भारतीय साड़ी पहने हुए एक तस्वीर तक छाप दी। मीडिया में Michelle Obama क्या मथुरा के पेढे खाएंगी या फिर बनारसी पान। दिल्ली में उनके लिए चाट कौन बना रहा है तो कान में बरेली का झुमका किस दुकान का होगा या फिर राजस्थानी लहरियां साड़ी कौन डिजाइयन करेगा आदि आदि स्टोरियों हो रही है। मीडिया भोली-भाली जनमानस को वह सब ऐसे बता रही है जैसे गोयाकि Michelle Obama नही बल्कि किसी बाग में गुल के गुले-गुले हो।

दूसरी महिला की बात करे तो वह है एन्टोनिया मैनो। नही समझे सर जी !  मेरा  मतलब ! है कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की चौथी बार चुनी गई अध्यक्ष श्रीमति सोनिया गांधी। इटली के विसेन्जा में एक छोटे से गांव लूसियाना में जन्मी सोनिया गांधी को अमेरिकी समाचार चैनल सीएनएन ने एशिया की सबसे आठ ताकतवर महिलाओं की सूची में शामिल किया है। इसके साथ ही प्रतिष्ठित पत्रिका फोर्ब़्स ने दुनिया की 6.8 अरब आबादी में से 68 सबसे ज्यादा ताकवारों लोगों की लिस्ट में भी शामिल किया है, सोनिया गांधी को। राजनीति में सोनिया की दबंगाई यही खत्म नही होती उन पर स्पेनिश लेखक जेवियर मोरो ने एक किताब " रेड साड़ी" लिख डाली। जिसपर कांग्रेसियों ने जमकर हौ-हव्वा मचाया और अंत में किताब के राईटर को कानूनी नोटिस तक भेज दिया मोरो ने अपनी किताब में लिखा है कि, "राजीव की मौत ने सोनिया को झक-झोर कर रख दिया और उसके बाद वह वापस इटली लौट जाना चाहती थी" यह बात कांग्रेसी कार्यकर्ताओं को ना गवारगुजरी।   भला यह कैसा हो सकता है कि उनका बहादुर योद्धा पति की मौत के बाद इतना कमजोर कैसे हो सकता है कि टूट कर वापस जाने की सोचे। गोयाकि कार्यकर्ता उतर गए विरोध-प्रदर्शन करने।

इस सप्ताह एक और बड़ी खबर आई भारत के पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर से। जहां आयरन लेडी ऑफ मणिपुर के नाम से मशहुर ईरोम शर्मिला चानू के अनशन को दस साल पूरे हो गए। पेशे से सामाजिक कार्यकर्ता-पत्रकार और कवि शर्मिला आर्म्ड फोर्सेस स्पेशल एक्ट (AFSPA) को रद्द करने की मांग कर रही है। आपको याद दिला दे कि भारत में सेना और अर्धसैनिक बलों पर अक्सर AFSPA के दुरूउपयोग के करने के आरोप लगते रहते है। शर्मिला के इ अनशन को जारी रखने का फैसाल भी इसके दुरूउपयोग को लेकर है। जो आज से दस साल पहले एक वृद्ध महिला लेईसांगबाम इबेटोमी और 1988 में राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार विजेता सिनाम चंद्रमणि की सुरक्षा बलों द्वारा की गई हत्या के आरोप में शुरू किया है।

इस दीपावली पर महिलाओं ने सबसे ज्यादा गदर मचाया विश्व के दो ताकवर देशों में हुए राजनीतिक चुनावों में। दक्षिण अमेरिका महाद्वीप के सबसे बड़े देश ब्राजील में सत्ताधारी वर्कर्स पार्टी की उम्मीदवार और विश्व में आयरन लेडी के नाम से मशहुर डिल्मा रॉसेफ ने राष्ट्रपति पद का चुनाव जितकर इतिहास रच डाला। तो दूसरी तरफ अमेरिका में हुए संसदीय चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी की उम्मीदवार निकी हैली ने डैमोक्रेट पार्टी के उम्मीदवार विसेंट शेहीन को हरा कर दक्षिणी कैरॉलाइना राज्य के गवर्नर और कमला देवी हैंरिस ने कांटे की टक्कर में रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार स्टीव कूली को हरा कर कैलीफोर्नियां के अटॉर्नी जनरल पद पर कब्जा कर लिया।

यह दोनों महिलाएं भारतीय मूल की है। कमला हैंरिस चैन्नई मूल की ड़ॉ श्यामला गोपालन और अफ्रीकी मूल के अर्थशास्त्री डोनल्ड हैंरिस की पुत्री है। कमला हैंरिस को महिला ओबामा के नाम से भी पुकारा जाता है, क्योंकि कमला को डैमोक्रेटिक पार्टी का उम्मीदवार बनाने के प्रस्ताव का समर्थन स्वंय बराक ओबामा ने किया था।

दुनिया में जनसंख्या के अनुपात में सबसे अधिक आबादी रखने वाला चीन भी किसी रूप में पीछे नही रहना चाहता। हाल ही शंघाई की हुरून ने अपनी एक रिपोर्ट में विश्व की तीन सर्वाधिक धनी महिलाओं का चीन का निवासी बताया है ।  इतना ही नही अमेरिकी समाचार चैनल सीएनएन ने अपनी सूची में चीन की नाईन ड्रेगनस पेपर होल्डिंग्स की मालिक झांग यीन को सर्वोच्च स्थान दिया है।

विश्व में रियल लाइफ की सबसे बड़ी दबंग है, 20 वर्षीय मारिसोल वालेस गार्सिया। इस रियल लाइफ दबंग को हाल ही में मेक्सिको के सबसे ज्यादा हिंसाग्रस्त शहर गुदाल्पु डिस्ट्रीटो ब्रावो का पुलिस प्रमुख नियुक्त किया गया है। 10,000 की आबादी वाले इस शहर में ड्रग माफिया का एकछत्र राज चलता है। ड्रग माफिया का ख़ौफ इतना है कि इस शहर में पोस्टिंग पाने वाले अधिकतर पुलिसवाले नौकरी छोड़ चुके है।

क्रिमिनोलॉजी की स्टूडेंट गार्सिया को हर महीने 400 डॉलर यानि लगभग 2 लाख रूपये के वेतन पर नियुक्ति किया गया है। पद संभालते हुए अपनी पहली प्रेसवार्ता में उन्होंने कहां कि, हालात बदल सकते हैं अगर हम खुद पर भरोसा रखें, और मैं हालात सुधाकर दुनिया को दिखाना चाहती हूं कि हां, हम ये कर सकते हैं, हम ये नयी पीढ़ी के लिए कर रहैं जो निश्चत रूप से डर के साए में नही रहना चाहती

चालिए ! जनाब । मैं तो चला इस दीवापली पर लक्ष्मी पूजा के साथ-साथ इन देवियों की भी पूजा करने। और आप मनाइए दीपों का पर्व दीपावली।।

अब्बास ताहिर
Tahir.abbas@saharasamay.com