11 सितम्बर 2009 को वर्ल्ड ट्रेड़ टावर पर हमले के बाद ओसामा बिन लादेन भले ही अमरीका के लिए खलनायक बन गया हो लेकिन हॉलीवुड और बॉलीवुड़ में वह एक नायक के रूप में पर्द पर नज़र आता रहा है। हमले के बाद लादेन पर कई टेलिविजन शॉ एवं एनिमेशन विड़ियों गम बनाए गए, और अब ओसामा बिन लादेन निर्देशक राकेश रंजन कुमार और अभिषेक शर्मा की रिलिज हुई फिल्म तेरे बिन लादेन में हीरों की तरह नज़र आ रहा है। अमरीकी ख़ुफिया एजेंसी सीआईए लादेन को वर्ल्ड ट्रेड़ सेंटर,1998 में अफ्रीका में अमरीकी दुतावास और यमन में अमरीकी युद्धपोत को अपना निशाना बनाने वाले लादेन को ढूंढ नही पाई हो लेकिन हमारी फिल्म इंडस्ट्री उसे किसी ना किसी रूप में खोज ही निकालती है। वॉलीवुड में सुपर साइज़ मी के निदर्शेक मोर्गेन स्परलॉक ने सबसे पहले जेरेमी चीलनीक के साथ कहानी लिखकर 2008 में व्हेयर इज दे वर्ल्ड इज़ ओसामा बिन लादेन फिल्म बनाई थी। जिसमें नायक की भूमिका खुद मोर्गेन स्परलॉक ने निभाई। जैसा कि फिल्म के टाइटल से ही पता चलता है कि दुनिया में ओसामा कहां है में नायक लादेन को ढूढ़ने के लिए दुनिया भर के दौरा पर निकल पड़ता है।
वह ओसामा की तलाश में रूस,अफगानिस्तान,इजराइल और अरब देशों की यात्राएं करता है,लेकिन लादेन कही नही मिलता। इन यात्राओं के दौरान नायक के साथ अजीबों-ग़रीब घटनाएं घटती है। व्यंग्य और हंसी-मजाक के दृश्यों को शानदार अभिनय के साथ दर्शाया गया।
हॉलीवुड का नायक भले ही लादेन को ना खोज पाया हो लेकिन ओसामा को ढूढ़ने, उसके नाम के साथ शोहरत और पैसा कामाने का फार्मूला लेकर आ रहे है अपनी पहली फिल्म के निर्देशक अभिषेक शर्मा। दूसरी ओर निदर्शेक राकेश रंजन ने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में हिटलर के योगदान और सुभाष चंद्र बोस के साथ जर्मनी में हुए व्यवहार पर डियर फैंड हिटलर नामक फिल्म बनाई है,जिसे सभी ने सराहा है। आरती शेट्टी एवं पूजा शेट्टी देउरा इसकी निर्माता है। तेरे लिए लादेन में पाकिस्तानी गायक अली जफर मुख्य भूमिका में नज़र आते है।
अली जफर की अमेरिका के लिए पहली यात्रा काफी सुखद नही रही, जिसके चलते वह अपनी छवि सुधारना चाहते थे। उनके सामने एक अतिगंभीर विषय था। 9/11 की घटना के बाद पूरी दुनिया में एक अजीब तरीके का बदलाव महसूस हो रहा है। एक व्यक्ति को एयरपोर्ट पर विमान से इसलिए उतार दिया जाता है क्योकि उसकी दाढ़ी है या फिर उसके नाम से पहले मोहम्मद या नाम के बाद ख़ान लगा है। या फिर इसी नाम के व्यक्ति को अमरीकी वीज़ा नही दिया जाता। और अगर वीजा मिल भी जाए तो उसे कही भी रोककर पूछताछ शुरू हो जाती है। शाहरूख़ ख़ान के अभिनय में बनी फिल्म माई नेम इज़ ख़ान भी इन मुद्दे को गंभीरता से उठाती है लेकिन तेरे बिन लादेन इन मुद्दों पर व्यंग्य करते हुए आगे बढ़ती है।
तेरे बिन लादेन में एक युवा पाकिस्तानी पत्रकार की कहानी है। जो पैसा और शोहरत कमाने के लिए अमरीका जाना चाहता है, अमरीका में 26 सितम्बर के हमलों के बाद एक खास समुदाय के लोगों एवं रिपोर्टर को वीज़ा देने से साफ मना कर दिया जाता है। वीज़ा रद्द हो जाने पर रिपोर्टर अमरीका जाने के लिए अनेक प्रयास करता है जो बेकार साबित होते है। तभी उसे एक फार्मूला सुझता है कि वह ओसामा बिन लादेन का विड़ियों बनाकर न्यूज़ चैनल को देगा। और देखते ही देखते तैयार होता है ओसामा बिन लादेन का एक फर्जी विड़ियों। फिर क्या पूरी दुनिया के साथ साथ अमरीका की नज़रे पत्रकार पर आ टिकती है। अमरीकी ख़ुफिया एजेंसी अपने एक एजेंट को पत्रकार अली के पीछे लगा देती है। पाकिस्तानी पत्रकार की पृष्ठभूमि पर बनी इस फिल्म के लिए लोकेशन की काफी दिक्कते निदर्शेक को हुई। फिर भी मुंबई और हैदराबाद में ऐसी कुछ लोकेशन दिखाई दी जो पाकिस्तानी शहर जैसी दिखती हो।
अगर हमें इसी साल की बात करें तो बॉलीवुड में नए विषयों पर फिल्में बनी है और कई सफल भी हुई है। जिनमें से पंख,इश्कियां,कार्तिक कॉलिंग कार्तिक और अनुप्म खेर की लाहौर फिल्मे लीक से हट कर बनी फिल्में थी। तेरे बिन लादेन एक गंभीर विषय पर आधारित फिल्म जरूर है लेकिन पूरी फिल्म में लोगों को एक नए तरहे का रोमांच देखने को मिलेता है।
