Monday, September 20, 2010
Saturday, September 18, 2010
बहन मिर्ची की शादी
(पिछले दिनों सब्जियों के दामों में भयानक वृद्धि के चलते अब्बा ने मुझें सुबह-सुबह सब्जी मंड़ी रवाना कर दिया। मंड़ी मुझें मंड़ी कम लगी बल्कि किसी विवाह समारोह का कार्यक्रम अधिक लगा....चारों तरफ अफरा-तफरी मची थी...वहीं एक सब्जी वाला एक चिठ्ठी लिखने में व्यस्त था...उसके ख़त का मजबून कुछ यूं था...)
प्रिय भाई
टमाटर लाल,
नमस्कार,
भगवान के असीम-प्रकोप से हम यहां ठीक ठाक हैं, जैसा की आपको पिछली चिठ्ठी में पिता जी (गोबीराज सिंह ) ने लिखा था कि हमारी छुटकी बहन लाल मिर्ची का विवाह बिहार सब्जी मंड़ी के प्रधान बैंगन कुमार झा क पुत्र टिंडा कुमार झा के साथ दिनांक 30 फरवरी को तय कर दिया गया है।
घर में शादी की सभी तैयारियां बड़े ही जोरशोर से चल रही है। पंजाब मंड़ी से बड़े भाईया कददु और भाभी भिंड़ी आ गई है। उत्तरप्रदेश मंड़ी आए सेम और चुकंदर भाईयां ने सजावट का काम संभाल लिया है। मध्यप्रदेश-राजस्थान सब्जी मंड़ी से आये आलू, गाजर और प्याज चाचा ने खाना बनाने और खिलाने का काम अपने हाथों में लिया है। हिमाचल मंडी से शिमला मिर्ची दीदी ने मेहमानों की आव-भगत और केरल से नारियाल मामा-मामी, महाराष्ट्र से आए लेहसून और शलजम फूफा ने पानी पिलाने के लिए कमर कस ली है।
भगवान की दुआ से सभी काम बांट दिए गए है और सब कुछ तय समय से चल रहा है।
भाई अब घर में बस तुम्हारा ही इंतेजार है...जल्द चले आओं...
ताऊ सीताफल ने प्यार...मां तौरी देवी ने प्रेमपूर्वक तुम्हे प्रणाम बोला है।
तुम्हारी बहन लाल मिर्ची और हरी मिर्ची और बड़े भाई बंद गोभी लाल ने तुम्हें स्नेह किया है।
पालक मौसा और हरा धनिया चाचा के साथ साथ मटूरू, चटरू और अपनी गटरू भी तुम्हें बहुत याद करती है।
बस भाई, तुम जल्दी से भाभी अरबी सिंह को लेकर चले आओं...
हम सब तुम्हारा यहां इंतेजार कर रहे है।
आपका छोटा भाई
मटर लाल
डिब्बा नं – 48,बड़ा गोदाम
मंड़ी भगवान पुर,दिल्ली।
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