इस बरस भी तू ना आया...
पूरा सावन मैंने यू ही बिताया ।
रैना बरसे झमा-झम...
नैना रोए घुमड़-घुमड़म।
दिल ने फिर तुझे पुकारा...
इस बरस भी तू ना आया।
तन भींगा,मन रोया...
काली बदरा से भी संदेशा भिजवाया।
मेघों में तेरा ही अक्स पाया...
ऐ ! सजन तूने फिर रूलाया।
इस बरस भी तू ना आया।।
(c) ABBAS,RH.TAHIR
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