Monday, September 20, 2010

ऐ ! सजन, तूने फिर रूलाया...









इस बरस भी तू ना आया...
पूरा सावन मैंने यू ही बिताया ।
रैना बरसे झमा-झम...
नैना रोए घुमड़-घुमड़म।
दिल ने फिर तुझे पुकारा...
इस बरस भी तू ना आया।
तन भींगा,मन रोया...
काली बदरा से भी संदेशा भिजवाया।
मेघों में तेरा ही अक्स पाया...
ऐ ! सजन तूने फिर रूलाया।
इस बरस भी तू ना आया।।





(c) ABBAS,RH.TAHIR

No comments: