नाटकों के महाकुंभ यानि भारत रंग उत्सव का आज समापन हो गया। एक सप्ताह तक चले इसे महाकुंभ का आगाज हुआ था चरणदास चोर के साथ और अंत हुआ फ्रांस के कलाकार लारेंट डेकाल के माइ परफार्मेस के साथ। एनएसडी के प्रवेश द्वार पर पहुंचते ही एक अलग दुनिया का अहसास दिलाने वाले इस उत्सव में भारत की सांझी विरासत को देख कर लोग मंत्रमुग्ध हो गए।
कला और संगीत की इस मंड़ी में देखने के लिए सब कुछ था, हर शाम एक नई सुबह थी और हर सुबह एक नई रात। रंगमंच की इस चकाचौंध ने विदेशी महमानों को भी चकाचौंध कर दिया है। 20 देशों के कलाकारों ने यहां अपनी कला का प्रदर्शन किया। जिसमें देसी-विदेशी कुल 81 नाटक हुए। जिनमें से 23 विदेशी थे। चीन, पाकिस्तान, फ्रांस, यूके, जापान, लंदन, श्रीलंका, संयुक्त राज्य अमेरिका, पोलैंड, बांग्लादेश, नेपाल, इटली के अलावा इस महोत्सव पहली बार शामिल हुए चिली, बोलिविया, इजिप्ट, अर्जेटीना, सर्बिया व यूक्रेन ने अपने प्रस्तृति से सबका मन मोह लिया।
छठे दिन ड्रीम ऑफ तालीम को मुंबई के प्रसिद्ध निर्देशक सुनील शानबाग ने नाटककार सचिन कुंदालकर के आलेख पर अपने कलाकारों के साथ काफी ख़ूबसुरती के साथ पेश किया। इस नाटक के जरीय हाल ही में अलविदा कहने वाले प्रतिभावान निर्देशक चेतन दातार को श्रद्धांजलि है। मंच पर केवल मेज, दो कुर्सियां और एक लैपटाप के द्वारा नाटक का मंचन करने वाले सुनील शानबाग पिछले काफी समय से दिल्ली के दर्शकों के बीच चर्चा का विषय रहे है। सुनील शानबाग ड्रीम ऑफ तालीम में समलैंगिकता जैसे गंभीर विषय बड़ी सावधानी के साथ उठाया है। नाटक के संवादों में समलैंगिकता की प्रक्रिया सटिक तरीके से लिखा गया है। मराठी बोलते बोलते अचानक मां का हिन्दी फ़िल्म के संवाद बोलना दर्शकों का मन मौह लेता है। असल में यह वही पल होते जब दर्शक नाटक में पूरी तरह से डूब जाते है।
स्त्री संबंधों पर आधारित सेंट्रल अकादमी ऑफ ड्रामा, चीन के नाटक The Amorous Lotus Pan इस उत्सव में चर्चा का विषय बना। प्रो. चेन गैंग द्वारा निर्देशित यह नाटक चीनी उपन्यास आउटलाज ऑफ दि मार्श की एक पात्र पैन जिनलियन पर आधारित था।
पैन जिनलियन के माता-पिता उसे बचपन में छोड़ कर चल बसते है। हालत और परिस्थितियों के बीच उसे झेंगदाऊ को बेच दिया जाता है जो एक अमीर आदमी होता और पैन को अपनी दूसरी पत्नि बनाना चाहता है लेकिन पैन जिनलियन इस बात के लिए राजी नही होती। गुस्से से पागल झेंग उसके साथ बलात्कार करता है और एक कायर और बेवाकूफ बौने व्यक्ति वुडा को दे देता है। इसी दौरान पैन वुडा के भाई सौंग के साथ प्यार करने लगती है लेकिन सौंग उसके प्यार को नही अपनाता। समय के साथ साथ कहानी आगे बढ़ती है तो पैन जिनलियन की ज़िदंगी में एक और अमीर व्यक्ति झिमैन आता है। जिसके कहने पर वोह वुडा को ज़हर देकर मार देती है। वुडा की मौत को उसका भाई सौंग बर्दाशत नही कर पाता और प्रतिशोध की ज्वाला में जलकर वह पैन जिनलियन की हत्या कर देता है।
हाल ही रिलिज हुई प्रकाश झा द्वारा निर्देशित फ़िल्म टर्न 30 में नायिका गुल पनाग भी अपने प्रेम को खोने-पाने और अपने भविष्य के प्रति सजग रहने के साथ साथ भारतीय समाज में व्याप्त स्त्री सोच को बयान करती है। फ़िल्म और चीनी नाटक दोनों में ही स्त्री मनोविज्ञान को समझा जा सकता है।
पूरे सप्ताह इतने सुनहरे पल बिताने के बावजूद मेरे मन का एक कोना अभी भी खाली रहे जाता है। Theater Café में लगी गुमटियां पर ना जाने कितने कलाकारों और लोगों ने चाय की चुसकियों का आनंद उठाया होगा। लोगों ने दिल्ली के स्वादिष्ट व्यंजनों का खाट-मूढ़ों पर बैठकर लुत्फ उठाया लेकिन मुझे इस कैफे में अम्मा की रसाई याद आ गई है। शायद नये ज़माने ने पूरानी यादों को कुछ धुंधला सा कर दिया है।
कला और संगीत की इस मंड़ी में देखने के लिए सब कुछ था, हर शाम एक नई सुबह थी और हर सुबह एक नई रात। रंगमंच की इस चकाचौंध ने विदेशी महमानों को भी चकाचौंध कर दिया है। 20 देशों के कलाकारों ने यहां अपनी कला का प्रदर्शन किया। जिसमें देसी-विदेशी कुल 81 नाटक हुए। जिनमें से 23 विदेशी थे। चीन, पाकिस्तान, फ्रांस, यूके, जापान, लंदन, श्रीलंका, संयुक्त राज्य अमेरिका, पोलैंड, बांग्लादेश, नेपाल, इटली के अलावा इस महोत्सव पहली बार शामिल हुए चिली, बोलिविया, इजिप्ट, अर्जेटीना, सर्बिया व यूक्रेन ने अपने प्रस्तृति से सबका मन मोह लिया।
छठे दिन ड्रीम ऑफ तालीम को मुंबई के प्रसिद्ध निर्देशक सुनील शानबाग ने नाटककार सचिन कुंदालकर के आलेख पर अपने कलाकारों के साथ काफी ख़ूबसुरती के साथ पेश किया। इस नाटक के जरीय हाल ही में अलविदा कहने वाले प्रतिभावान निर्देशक चेतन दातार को श्रद्धांजलि है। मंच पर केवल मेज, दो कुर्सियां और एक लैपटाप के द्वारा नाटक का मंचन करने वाले सुनील शानबाग पिछले काफी समय से दिल्ली के दर्शकों के बीच चर्चा का विषय रहे है। सुनील शानबाग ड्रीम ऑफ तालीम में समलैंगिकता जैसे गंभीर विषय बड़ी सावधानी के साथ उठाया है। नाटक के संवादों में समलैंगिकता की प्रक्रिया सटिक तरीके से लिखा गया है। मराठी बोलते बोलते अचानक मां का हिन्दी फ़िल्म के संवाद बोलना दर्शकों का मन मौह लेता है। असल में यह वही पल होते जब दर्शक नाटक में पूरी तरह से डूब जाते है।
स्त्री संबंधों पर आधारित सेंट्रल अकादमी ऑफ ड्रामा, चीन के नाटक The Amorous Lotus Pan इस उत्सव में चर्चा का विषय बना। प्रो. चेन गैंग द्वारा निर्देशित यह नाटक चीनी उपन्यास आउटलाज ऑफ दि मार्श की एक पात्र पैन जिनलियन पर आधारित था।
पैन जिनलियन के माता-पिता उसे बचपन में छोड़ कर चल बसते है। हालत और परिस्थितियों के बीच उसे झेंगदाऊ को बेच दिया जाता है जो एक अमीर आदमी होता और पैन को अपनी दूसरी पत्नि बनाना चाहता है लेकिन पैन जिनलियन इस बात के लिए राजी नही होती। गुस्से से पागल झेंग उसके साथ बलात्कार करता है और एक कायर और बेवाकूफ बौने व्यक्ति वुडा को दे देता है। इसी दौरान पैन वुडा के भाई सौंग के साथ प्यार करने लगती है लेकिन सौंग उसके प्यार को नही अपनाता। समय के साथ साथ कहानी आगे बढ़ती है तो पैन जिनलियन की ज़िदंगी में एक और अमीर व्यक्ति झिमैन आता है। जिसके कहने पर वोह वुडा को ज़हर देकर मार देती है। वुडा की मौत को उसका भाई सौंग बर्दाशत नही कर पाता और प्रतिशोध की ज्वाला में जलकर वह पैन जिनलियन की हत्या कर देता है।
हाल ही रिलिज हुई प्रकाश झा द्वारा निर्देशित फ़िल्म टर्न 30 में नायिका गुल पनाग भी अपने प्रेम को खोने-पाने और अपने भविष्य के प्रति सजग रहने के साथ साथ भारतीय समाज में व्याप्त स्त्री सोच को बयान करती है। फ़िल्म और चीनी नाटक दोनों में ही स्त्री मनोविज्ञान को समझा जा सकता है।
पूरे सप्ताह इतने सुनहरे पल बिताने के बावजूद मेरे मन का एक कोना अभी भी खाली रहे जाता है। Theater Café में लगी गुमटियां पर ना जाने कितने कलाकारों और लोगों ने चाय की चुसकियों का आनंद उठाया होगा। लोगों ने दिल्ली के स्वादिष्ट व्यंजनों का खाट-मूढ़ों पर बैठकर लुत्फ उठाया लेकिन मुझे इस कैफे में अम्मा की रसाई याद आ गई है। शायद नये ज़माने ने पूरानी यादों को कुछ धुंधला सा कर दिया है।

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